नागरिक-केंद्रित शासन के लिए क्षमता निर्माण को सुदृढ़ बनाना

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन

संदर्भ

  • राष्ट्रीय प्रगति हेतु अनुकूलनशील विकास और मानवीय दक्षता को सुदृढ़ करना (साधना/Sādhana) सप्ताह 2026 भारत में आयोजित होने वाली सबसे बड़ी सहयोगात्मक क्षमता निर्माण पहलों में से एक है।

साधना/Sādhana सप्ताह 2026

  • इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों के कौशल और दक्षताओं को बढ़ाकर नागरिक-केंद्रित, उत्तरदायी एवं दक्ष शासन को प्रोत्साहित करना है।
  • यह पहल कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), क्षमता निर्माण आयोग (CBC), और कर्मयोगी भारत द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों एवं प्रशिक्षण संस्थानों को एक साथ लाया जा रहा है।
  • यह कार्यक्रम क्षमता निर्माण आयोग के स्थापना दिवस और मिशन कर्मयोगी के पाँच वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है, जिसका नारा है — “हम बने कर्मयोगी”
  • साधना सप्ताह के अंतर्गत प्रारंभ की गई पहलें:
    • कर्मयोगी क्षमता कनेक्ट : अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की क्षमता को संरचित शिक्षण मॉड्यूल्स के माध्यम से विकसित करना, जिससे वे नागरिक-केंद्रित सेवाओं को अधिक दक्षता और डिजिटल जागरूकता के साथ प्रदान कर सकें।
    • उन्नति पोर्टल (UNNATI Portal): एकीकृत डिजिटल आधारभूत संरचना स्थापित करता है, जिससे प्रशिक्षण संस्थानों को वास्तविक समय में निगरानी, सहयोग और डेटा-आधारित क्षमता निर्माण में सक्षम बनाया जा सके।
    • iGOT लर्निंग असेसमेंट फ्रेमवर्क: एक विश्वास-आधारित मूल्यांकन प्रणाली प्रस्तुत करता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सीखने के परिणाम वास्तविक कार्यस्थल पर लागू हों और शासन पर सकारात्मक प्रभाव डालें।
    • कर्मयोगी गान : समर्पण, सेवा और सतत् सीखने की भावना को प्रतिबिंबित करता है, जिसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एकीकृत किया जाएगा ताकि मिशन कर्मयोगी की भावना को सुदृढ़ किया जा सके।

नागरिक-केंद्रित शासन क्या है?

  • नागरिक-केंद्रित शासन सार्वजनिक प्रशासन का एक मॉडल है, जिसमें नागरिकों की आवश्यकताओं, कल्याण और सक्रिय भागीदारी को सभी सरकारी कार्यों के केंद्र में रखा जाता है।
  • इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, जिससे नागरिक केवल सेवाओं के प्राप्तकर्ता न रहकर निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में भागीदार बन सकें।

नागरिक-केंद्रित शासन को प्रोत्साहित करने वाली सरकारी पहलें

  • मिशन कर्मयोगी (NPCSCB): 2020 में प्रारंभ की गई भारत सरकार की प्रमुख पहल, जिसका उद्देश्य भारतीय सिविल सेवाओं को “नियम-आधारित” से “भूमिका-आधारित” दृष्टिकोण में परिवर्तित करना है, ताकि अधिकारी रचनात्मक, सक्रिय, पेशेवर और भविष्य-उन्मुख बन सकें।
  • सेवोत्तम मॉडल: 2006 में प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा प्रस्तुत गुणवत्ता प्रबंधन ढाँचा, जो सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार हेतु संरचित दृष्टिकोण प्रदान करता है।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI): आधार-आधारित सेवाएँ और UPI भुगतान तंत्र जैसी पहलें नागरिकों के लिए पहुँच, दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाती हैं।

नागरिक-केंद्रित शासन प्राप्त करने में चुनौतियाँ

  • नौकरशाही जड़ता: पारंपरिक नियम-आधारित प्रणाली से परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध।
  • क्षमता अंतराल: अधिकारियों में कौशल, प्रशिक्षण और डिजिटल साक्षरता की कमी, विशेषकर बुनियादी स्तर पर।
  • डिजिटल विभाजन: प्रौद्योगिकी और इंटरनेट तक असमान पहुँच।
  • खंडित सेवा वितरण: विभागों के बीच समन्वय की कमी से अक्षमताएँ और विलंब।
  • कमज़ोर जवाबदेही तंत्र: नागरिक परिणामों से जुड़ी प्रदर्शन माप प्रणाली का अभाव।

क्षमता निर्माण आयोग

  • स्थापना वर्ष: 2021
  • यह तीन सदस्यीय आयोग है, जिसे सचिव के नेतृत्व वाले आंतरिक सचिवालय का सहयोग प्राप्त है।
    • इसके सदस्य निजी क्षेत्र, अकादमिक जगत, सार्वजनिक क्षेत्र और नागरिक समाज जैसे विविध पृष्ठभूमियों से नियुक्त किए गए हैं।
  • CBC मिशन कर्मयोगी ढाँचे का संरक्षक है, जो क्षमता निर्माण और दक्षता-आधारित शिक्षण के माध्यम से सिविल सेवा सुधारों को आगे बढ़ाता है।
  • आयोग ढाँचे तैयार करता है, मानक निर्धारित करता है और सहयोग को प्रोत्साहित करता है ताकि शासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, नागरिक-केंद्रित एवं भविष्य-उन्मुख बन सके।

आगे की राह

  • केंद्र–राज्य क्षमता अंतराल को पाटना: केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में क्षमता निर्माण ढाँचों का सामंजस्य स्थापित करना आवश्यक है, ताकि शासन मानकों में एकरूपता सुनिश्चित हो सके।
  • प्रतिक्रिया तंत्र: प्रभाव मूल्यांकन, प्रतिक्रिया चक्र और वास्तविक समय निगरानी हेतु सुदृढ़ प्रणालियाँ विकसित की जानी चाहिए, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को निरंतर परिष्कृत किया जा सके।
  • जमीनी स्तर पर शासन को सुदृढ़ करना: पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि अंतिम छोर तक सेवा वितरण नागरिक-केंद्रित उद्देश्यों के अनुरूप हो सके।

स्रोत: PIB

 

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